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सुनन अबू दाऊद

नंबर 586

नंबर 586किताब 2, नंबर 196
حَدَّثَنَا النُّفَيْلِيُّ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، حَدَّثَنَا عَاصِمٌ الأَحْوَلُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ سَلِمَةَ، بِهَذَا الْخَبَرِ قَالَ فَكُنْتُ أَؤُمُّهُمْ فِي بُرْدَةٍ مُوصَلَةٍ فِيهَا فَتْقٌ فَكُنْتُ إِذَا سَجَدْتُ خَرَجَتِ اسْتِي ‏.‏
This tradition has also been transmitted through a different chain by ‘Amr b. Salamah. This version says:“I used to lead them in prayer with a sheet of cloth on me that was patched and torn. When I prostrated myself, my buttocks were disclosed
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।