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सुनन अबू दाऊद

नंबर 583

नंबर 583किताब 2, नंबर 193
حَدَّثَنَا ابْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ فِيهِ ‏"‏ وَلاَ يَؤُمُّ الرَّجُلُ الرَّجُلَ فِي سُلْطَانِهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ كَذَا قَالَ يَحْيَى الْقَطَّانُ عَنْ شُعْبَةَ ‏"‏ أَقْدَمُهُمْ قِرَاءَةً ‏"‏ ‏.‏
The version of this tradition narrated through a different chain by Shu’bah has the words:“A man should not lead the another man in prayer. Abu Dawud said: Yahya al-Qattan narrated from Shu’bah in a similar way, i.e. the earliest of them in recitation
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।