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सुनन अबू दाऊद

नंबर 561

नंबर 561किताब 2, नंबर 171
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مَعِينٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عُبَيْدَةَ الْحَدَّادُ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ أَبُو سُلَيْمَانَ الْكَحَّالُ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَوْسٍ، عَنْ بُرَيْدَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ بَشِّرِ الْمَشَّائِينَ فِي الظُّلَمِ إِلَى الْمَسَاجِدِ بِالنُّورِ التَّامِّ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Buraydah ibn al-Hasib: The Prophet (ﷺ) said: Give good tidings to those who walk to the mosques in darkness for having a perfect light on the Day of Judgment
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।