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सुनन अबू दाऊद

नंबर 554

नंबर 554किताब 2, नंबर 164
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَصِيرٍ، عَنْ أُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ، قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمًا الصُّبْحَ فَقَالَ ‏"‏ أَشَاهِدٌ فُلاَنٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ أَشَاهِدٌ فُلاَنٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ إِنَّ هَاتَيْنِ الصَّلاَتَيْنِ أَثْقَلُ الصَّلَوَاتِ عَلَى الْمُنَافِقِينَ وَلَوْ تَعْلَمُونَ مَا فِيهِمَا لأَتَيْتُمُوهُمَا وَلَوْ حَبْوًا عَلَى الرُّكَبِ وَإِنَّ الصَّفَّ الأَوَّلَ عَلَى مِثْلِ صَفِّ الْمَلاَئِكَةِ وَلَوْ عَلِمْتُمْ مَا فَضِيلَتُهُ لاَبْتَدَرْتُمُوهُ وَإِنَّ صَلاَةَ الرَّجُلِ مَعَ الرَّجُلِ أَزْكَى مِنْ صَلاَتِهِ وَحْدَهُ وَصَلاَتُهُ مَعَ الرَّجُلَيْنِ أَزْكَى مِنْ صَلاَتِهِ مَعَ الرَّجُلِ وَمَا كَثُرَ فَهُوَ أَحَبُّ إِلَى اللَّهِ تَعَالَى ‏"‏ ‏.‏
उबय बिन काब -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक दिन हमें फ़ज्र की नमाज़ पढ़ाई, फिर पूछा : “क्या अमुक व्यक्ति उपस्थित है?” लोगों ने कहा : नहीं। आपने पुनः पूछा : “क्या अमुक व्यक्ति उपस्थित है?” लोगों ने कहा : नहीं। आपने फ़रमाया : “यह दो नमाज़ें मुनाफिकों के लिए सर्वाधिक कठिन हैं और यदि वह जान लेते कि इनमें कितना सवाब है, तो वे अवश्य आते, चाहे (हाथ एवं) घुटनों के बल घिसटते हुए ही क्यों न हो। प्रथम सफ (पंक्ति) फरिश्तों की सफ के समान है। यदि तुम इसकी फज़ीलत (महत्व) जान लेते, तो इसके लिए जल्दी करते। एक आदमी की नमाज़ दूसरे आदमी के साथ अकेले नमाज़ पढ़ने से बेहतर है और दो आदमियों के साथ नमाज़ पढ़ना एक आदमी के साथ नमाज़ पढ़ने से बेहतर है। लोग (नमाज़ में) जितने अधिक होंगे, नमाज़ अल्लाह तआला के समीप उतनी अधिक प्रिय होगी।”

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।