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सुनन अबू दाऊद

नंबर 544

नंबर 544किताब 2, नंबर 154
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ أُقِيمَتِ الصَّلاَةُ وَرَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَجِيٌّ فِي جَانِبِ الْمَسْجِدِ فَمَا قَامَ إِلَى الصَّلاَةِ حَتَّى نَامَ الْقَوْمُ ‏.‏
Anas reported :the Iqamah was pronounced (for the night prayer) and the Messenger of Allah (ﷺ) remained engaged in talking (to a person) in the corner of the mosque. He did not begin prayer until the people slept
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (642) Sahih Muslim (376)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।