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सुनन अबू दाऊद

नंबर 528

नंबर 528किताब 2, नंबर 138
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ الْعَتَكِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ ثَابِتٍ، حَدَّثَنِي رَجُلٌ، مِنْ أَهْلِ الشَّامِ عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ، أَوْ عَنْ بَعْضِ، أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّ بِلاَلاً أَخَذَ فِي الإِقَامَةِ فَلَمَّا أَنْ قَالَ قَدْ قَامَتِ الصَّلاَةُ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَقَامَهَا اللَّهُ وَأَدَامَهَا ‏"‏ ‏.‏ وَقَالَ فِي سَائِرِ الإِقَامَةِ كَنَحْوِ حَدِيثِ عُمَرَ - رضى الله عنه - فِي الأَذَانِ ‏.‏
Narrated AbuUmamah, or one of the Companion of the Prophet: Bilal began the Iqamah, and when he said: "The time for prayer has come," the Prophet (ﷺ) said: "May Allah establish it and cause it to continue
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।