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सुनन अबू दाऊद

नंबर 513

नंबर 513किताब 2, नंबर 123
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ الْقَوَارِيرِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو، - شَيْخٌ مِنْ أَهْلِ الْمَدِينَةِ مِنَ الأَنْصَارِ - قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ مُحَمَّدٍ قَالَ كَانَ جَدِّي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ يُحَدِّثُ بِهَذَا الْخَبَرِ قَالَ فَأَقَامَ جَدِّي ‏.‏
This tradition has also been transmitted through a different chain of narrators by ‘abd Allah b. Zaid. He said:My grandfather pronounced the Iqamah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।