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सुनन अबू दाऊद

नंबर 494

नंबर 494किताब 2, नंबर 104
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى، - يَعْنِي ابْنَ الطَّبَّاعِ - حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ الرَّبِيعِ بْنِ سَبْرَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مُرُوا الصَّبِيَّ بِالصَّلاَةِ إِذَا بَلَغَ سَبْعَ سِنِينَ وَإِذَا بَلَغَ عَشْرَ سِنِينَ فَاضْرِبُوهُ عَلَيْهَا ‏"‏ ‏.‏
Narrated As-Saburah: The Prophet (ﷺ) said: Command a boy to pray when he reaches the age of seven years. When he becomes ten years old, then beat him for prayer
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।