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सुनन अबू दाऊद

नंबर 468

नंबर 468किताब 2, नंबर 78
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عُمَيْسٍ، عُتْبَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَامِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ رَجُلٍ، مِنْ بَنِي زُرَيْقٍ عَنْ أَبِي قَتَادَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِنَحْوِهِ زَادَ ‏ "‏ ثُمَّ لْيَقْعُدْ بَعْدُ إِنْ شَاءَ أَوْ لِيَذْهَبْ لِحَاجَتِهِ ‏"‏ ‏.‏
This tradition has been narrated by Abu Qatadah through a different chain of transmitters to the same effect from the prophet (ﷺ). This version adds:then he may remain sitting (after praying two RAKAHS) or may go for his work
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।