सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन अबू दाऊद

नंबर 456

नंबर 456किताब 2, नंबर 66
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ دَاوُدَ بْنِ سُفْيَانَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، - يَعْنِي ابْنَ حَسَّانَ - حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سَعْدِ بْنِ سَمُرَةَ، حَدَّثَنِي خُبَيْبُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ أَبِيهِ، سُلَيْمَانَ بْنِ سَمُرَةَ عَنْ أَبِيهِ، سَمُرَةَ أَنَّهُ كَتَبَ إِلَى ابْنِهِ أَمَّا بَعْدُ فَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَأْمُرُنَا بِالْمَسَاجِدِ أَنْ نَصْنَعَهَا فِي دِيَارِنَا وَنُصْلِحَ صَنْعَتَهَا وَنُطَهِّرَهَا ‏.‏
Samurah reported that he wrote (a letter) to his sons:After (praising Allah and blessing the Prophet) that: The Messenger of Allah (ﷺ) used to command us to build mosques in our localities and keep them well and clean
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।