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सुनन अबू दाऊद

नंबर 434

नंबर 434किताब 2, नंबर 44
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ الطَّيَالِسِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو هَاشِمٍ، - يَعْنِي الزَّعْفَرَانِيَّ - حَدَّثَنِي صَالِحُ بْنُ عُبَيْدٍ، عَنْ قَبِيصَةَ بْنِ وَقَّاصٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَكُونُ عَلَيْكُمْ أُمَرَاءُ مِنْ بَعْدِي يُؤَخِّرُونَ الصَّلاَةَ فَهِيَ لَكُمْ وَهِيَ عَلَيْهِمْ فَصَلُّوا مَعَهُمْ مَا صَلَّوُا الْقِبْلَةَ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Qabisah ibn Waqqas: The Messenger of Allah (ﷺ) said: After me you will be ruled by rulers who will delay the prayer and it will be to your credit but to their discredit. So pray with them so long as they pray facing the qiblah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।