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सुनन अबू दाऊद

नंबर 424

नंबर 424किताब 2, नंबर 34
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ عَجْلاَنَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُمَرَ بْنِ قَتَادَةَ بْنِ النُّعْمَانِ، عَنْ مَحْمُودِ بْنِ لَبِيدٍ، عَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ أَصْبِحُوا بِالصُّبْحِ فَإِنَّهُ أَعْظَمُ لأُجُورِكُمْ ‏"‏ ‏.‏ أَوْ ‏"‏ أَعْظَمُ لِلأَجْرِ ‏"‏ ‏.‏
राफ़े बिन ख़दीज (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: सुबह की नमाज़ सुबह होने के बाद ही पढ़ो; क्योंकि इससे तुम्हें अधिक नेकी मिलती है, या इससे नेकी अधिक मिलती है।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।