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सुनन अबू दाऊद

नंबर 404

नंबर 404किताब 2, नंबर 14
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّهُ أَخْبَرَهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُصَلِّي الْعَصْرَ وَالشَّمْسُ بَيْضَاءُ مُرْتَفِعَةٌ حَيَّةٌ وَيَذْهَبُ الذَّاهِبُ إِلَى الْعَوَالِي وَالشَّمْسُ مُرْتَفِعَةٌ ‏.‏
Anas b. Malik said the Messenger of Allah (ﷺ) used to say the 'Asr prayer when the sun was high and bright and living, then one would go off to al-'Awali and get there while the sun was still high
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (621)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।