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सुनन अबू दाऊद

नंबर 392

नंबर 392किताब 2, नंबर 2
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ الْمَدَنِيُّ، عَنْ أَبِي سُهَيْلٍ، نَافِعِ بْنِ مَالِكِ بْنِ أَبِي عَامِرٍ بِإِسْنَادِهِ بِهَذَا الْحَدِيثِ قَالَ ‏ "‏ أَفْلَحَ وَأَبِيهِ إِنْ صَدَقَ دَخَلَ الْجَنَّةَ وَأَبِيهِ إِنْ صَدَقَ ‏"‏ ‏.‏
This tradition has also been reported by Abu Suhail Nafi' b. Malik b. Abi 'Amir through a different chain of narrators. It adds:He will be successful, by his father, if he speaks the truth; he will enter Paradise, by his father, if he speaks the truth
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAl-Albani
  • ShadhMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih Bukhari (1891 Mukhtasar) Sahih Muslim (11)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।