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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1148

नंबर 1148किताब 2, नंबर 759
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَهَنَّادٌ، - وَهَذَا لَفْظُهُ - قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ سِمَاكٍ، - يَعْنِي ابْنَ حَرْبٍ - عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم غَيْرَ مَرَّةٍ وَلاَ مَرَّتَيْنِ الْعِيدَيْنِ بِغَيْرِ أَذَانٍ وَلاَ إِقَامَةٍ ‏.‏
Jabir b. Samurah said:I prayed the 'Id prayer with the Prophet (ﷺ) not once or twice (but many times) without the adhan and the iqamah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (887)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।