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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1101

नंबर 1101किताब 2, नंबर 712
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ سُفْيَانَ، قَالَ حَدَّثَنِي سِمَاكٌ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ كَانَتْ صَلاَةُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَصْدًا وَخُطْبَتُهُ قَصْدًا يَقْرَأُ آيَاتٍ مِنَ الْقُرْآنِ وَيُذَكِّرُ النَّاسَ ‏.‏
Jabir b. Samurah said:The prayer offered by the Messenger of Allah (ﷺ) was moderate, and the sermon given by him was (also) moderate. He would recite a few verses from the Qur'an and exhort the people
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।