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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1094

नंबर 1094किताब 2, नंबर 705
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى، وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، - الْمَعْنَى - عَنْ أَبِي الأَحْوَصِ، حَدَّثَنَا سِمَاكٌ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ كَانَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خُطْبَتَانِ كَانَ يَجْلِسُ بَيْنَهُمَا يَقْرَأُ الْقُرْآنَ وَيُذَكِّرُ النَّاسَ ‏.‏
Jabir b. Samurah said:The Messenger of Allah (ﷺ) gave two sermons between which he sat, recited the Quran and gave the people an exhortation
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (862)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।