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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1063

नंबर 1063किताब 2, नंबर 674
حَدَّثَنَا الْقَعْنَبِيُّ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ، - يَعْنِي أَذَّنَ بِالصَّلاَةِ فِي لَيْلَةٍ ذَاتِ بَرْدٍ وَرِيحٍ - فَقَالَ أَلاَ صَلُّوا فِي الرِّحَالِ ثُمَّ قَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَأْمُرُ الْمُؤَذِّنَ إِذَا كَانَتْ لَيْلَةٌ بَارِدَةٌ أَوْ ذَاتُ مَطَرٍ يَقُولُ أَلاَ صَلُّوا فِي الرِّحَالِ ‏.‏
Nafi said:Ibn ‘Umar made the call to prayer on a cold and windy night. He then said: “Lo! Pray in the dwellings. “Afterwards he said: Whenever there was a cold or rainy day night, the Messenger of Allah (ﷺ) used to command the mu’adhdin to announce: “Lo! Pray in the dwellings.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (666) Sahih Muslim (697)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।