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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1033

नंबर 1033किताब 2, नंबर 644
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُسَافِعٍ، أَنَّ مُصْعَبَ بْنَ شَيْبَةَ، أَخْبَرَهُ عَنْ عُتْبَةَ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ جَعْفَرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ شَكَّ فِي صَلاَتِهِ فَلْيَسْجُدْ سَجْدَتَيْنِ بَعْدَ مَا يُسَلِّمُ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Abdullah ibn Ja'far: The Prophet (ﷺ) said: Anyone who is in doubt in his prayer should make two prostrations after giving the salutation
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।