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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1017

नंबर 1017किताब 2, नंबर 628
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ ثَابِتٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ، أَخْبَرَنَا أَبُو أُسَامَةَ، أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَسَلَّمَ فِي الرَّكْعَتَيْنِ ‏.‏ فَذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ ابْنِ سِيرِينَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ ثُمَّ سَجَدَ سَجْدَتَىِ السَّهْوِ ‏.‏
Ibn ‘Umar said :The Messenger of Allah (ﷺ) led us in prayer and gave the salutation after two rakahs of prayer. He narrated this tradition like that of Ibn Sirin from Abu Hurairah. This version adds; he gave the salutation and prostrated two prostrations due to forgetfulness
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।