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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1001

नंबर 1001किताब 2, नंबर 612
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ أَبُو الْجَمَاهِرِ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ بَشِيرٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ سَمُرَةَ، قَالَ أَمَرَنَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَنْ نَرُدَّ عَلَى الإِمَامِ وَأَنْ نَتَحَابَّ وَأَنْ يُسَلِّمَ بَعْضُنَا عَلَى بَعْضٍ ‏.‏
Narrated Samurah ibn Jundub: The Prophet (ﷺ) commanded us to respond to the salutation of the imam. and to love each other, and to salute each other
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Prayer (Kitab Al-Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।