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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2862

नंबर 2862किताब 18, नंबर 1
حَدَّثَنَا مُسَدَّدُ بْنُ مُسَرْهَدٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنِي نَافِعٌ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، - يَعْنِي ابْنَ عُمَرَ - عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَا حَقُّ امْرِئٍ مُسْلِمٍ لَهُ شَىْءٌ يُوصِي فِيهِ يَبِيتُ لَيْلَتَيْنِ إِلاَّ وَوَصِيَّتُهُ مَكْتُوبَةٌ عِنْدَهُ ‏"‏ ‏.‏
Narrated 'Abdullah bin 'Umar:The Messenger of Allah (ﷺ) as saying: It is the duty of a Muslim man who has something which is to be given as bequest not to have it for two nights without having his will written regarding it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (2738) Sahih Muslim (1627)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 18 · Wills (Kitab Al-Wasaya)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।