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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2774

नंबर 2774किताब 15, नंबर 298
حَدَّثَنَا مَخْلَدُ بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، بَكَّارِ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ أَخْبَرَنِي أَبِي عَبْدُ الْعَزِيزِ، عَنْ أَبِي بَكْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ كَانَ إِذَا جَاءَهُ أَمْرُ سُرُورٍ أَوْ بُشِّرَ بِهِ خَرَّ سَاجِدًا شَاكِرًا لِلَّهِ ‏.‏
अबू बकरा -रज़ियल्लाहु अंहु- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के बारे में कहते हैं कि जब आपके पास कोई ख़ुशी की बात आती या आपको कोई खुशखबरी दी जाती , तो अल्लाह के शुक्राने के तौर पर सजदे में चल जाते।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।