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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2742

नंबर 2742किताब 15, नंबर 266
حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ عُتْبَةَ الدِّمَشْقِيُّ، قَالَ قَالَ الْوَلِيدُ - يَعْنِي ابْنَ مُسْلِمٍ - حَدَّثْتُ ابْنَ الْمُبَارَكِ، بِهَذَا الْحَدِيثِ قُلْتُ وَكَذَا حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فَرْوَةَ، عَنْ نَافِعٍ، قَالَ لاَ تَعْدِلْ مَنْ سَمَّيْتَ بِمَالِكٍ هَكَذَا أَوْ نَحْوَهُ يَعْنِي مَالِكَ بْنَ أَنَسٍ ‏.‏
Al Walid bin Muslim said “I narrated this tradition (mentioned above) to Ibn Al Mubarak and said “And similarly it has been narrated by Ibn Abi Farwah to us on the authority of Nafi’(as narrated by Shu’aib). He (Ibn Al Mubarak) said “Those whom you have named cannot be equal to Malik i.e, Malik bin Anas
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।