حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ، حَدَّثَنِي الْمَسْعُودِيُّ، حَدَّثَنِي أَبُو عَمْرَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ أَتَيْنَا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَرْبَعَةَ نَفَرٍ وَمَعَنَا فَرَسٌ فَأَعْطَى كُلَّ إِنْسَانٍ مِنَّا سَهْمًا وَأَعْطَى لِلْفَرَسِ سَهْمَيْنِ .
Narrated AbuUmrah (al-Ansari?): We four persons, came to the Messenger of Allah (ﷺ), and we (i.e. each one of us) had horses. He therefore, allotted one portion for each of us, and two portions for his horse
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।