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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2707

नंबर 2707किताब 15, नंबर 231
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُصَفَّى، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ حَمْزَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ الْعَزِيزِ، - شَيْخٌ مِنْ أَهْلِ الأُرْدُنِّ - عَنْ عُبَادَةَ بْنِ نُسَىٍّ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ غَنْمٍ، قَالَ رَابَطْنَا مَدِينَةَ قِنَّسْرِينَ مَعَ شُرَحْبِيلَ بْنِ السِّمْطِ فَلَمَّا فَتَحَهَا أَصَابَ فِيهَا غَنَمًا وَبَقَرًا فَقَسَمَ فِينَا طَائِفَةً مِنْهَا وَجَعَلَ بَقِيَّتَهَا فِي الْمَغْنَمِ فَلَقِيتُ مُعَاذَ بْنَ جَبَلٍ فَحَدَّثْتُهُ فَقَالَ مُعَاذٌ غَزَوْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَيْبَرَ فَأَصَبْنَا فِيهَا غَنَمًا فَقَسَمَ فِينَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم طَائِفَةً وَجَعَلَ بَقِيَّتَهَا فِي الْمَغْنَمِ ‏.‏
अब्दुर रहमान बिन ग़न्म कहते हैंः हम शुरहबील बिन सिम्त के साथ क़िन्नसरीन नगर की सीमाओं में तैनात थे। जब उन्होंने उसपर विजय प्राप्त की, तो वहाँ बकरियाँ और गाएँ मिलीं, जिसका कुछ भाग हमारे बीच बाँट दिया और शेष को माल-ए-ग़नीमत में जमा कर दिया। फिर मैंने मुआज़ बिन जबल (रज़ियल्लाहु अंहु) से मुलाक़ात की और इस घटना का ज़िक्र किया, तो मुआज़ (रज़ियल्लाहु अंहु) ने फ़रमायाः हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ ख़ैबर युद्ध में शरीक हुए, जहाँ हमें बकरियाँ मिलीं, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसका कुछ भाग हमारे बीच बाँट दिया और शेष को माल-ए-ग़नीमत में जमा कर दिया।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • HasanShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।