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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2674

नंबर 2674किताब 15, नंबर 198
حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ خَالِدٍ، وَقُتَيْبَةُ، أَنَّ اللَّيْثَ بْنَ سَعْدٍ، حَدَّثَهُمْ عَنْ بُكَيْرٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ بَعَثَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي بَعْثٍ فَقَالَ ‏ "‏ إِنْ وَجَدْتُمْ فُلاَنًا وَفُلاَنًا ‏"‏ ‏.‏ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ ‏.‏
Abu Hurairah said:The Messenger of Allah (ﷺ) sent us along with a contingent, and said: If you find so-and-so. He then narrated the rest of the tradition to the same effect
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (3016)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।