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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2661

नंबर 2661किताब 15, नंबर 185
حَدَّثَنَا ابْنُ عَوْفٍ، حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ أَبِي سُفْيَانَ بْنِ أَسِيدِ بْنِ جَارِيَةَ الثَّقَفِيُّ، - وَهُوَ حَلِيفٌ لِبَنِي زُهْرَةَ - وَكَانَ مِنْ أَصْحَابِ أَبِي هُرَيْرَةَ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ ‏.‏
Al Zuhri said “This tradition has been transmitted to me by ‘Amr bin Abu Sufyan bin Usaid bin Jariyat Al Thaqafi who was an ally of Banu Zuhrah and a companion of Abu Hurairah. He then narrated the tradition.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (3045)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।