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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2645

नंबर 2645किताब 15, नंबर 169
حَدَّثَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ قَيْسٍ، عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سَرِيَّةً إِلَى خَثْعَمٍ فَاعْتَصَمَ نَاسٌ مِنْهُمْ بِالسُّجُودِ فَأَسْرَعَ فِيهِمُ الْقَتْلُ - قَالَ - فَبَلَغَ ذَلِكَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَأَمَرَ لَهُمْ بِنِصْفِ الْعَقْلِ وَقَالَ ‏"‏ أَنَا بَرِيءٌ مِنْ كُلِّ مُسْلِمٍ يُقِيمُ بَيْنَ أَظْهُرِ الْمُشْرِكِينَ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ لِمَ قَالَ ‏"‏ لاَ تَرَاءَى نَارَاهُمَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ رَوَاهُ هُشَيْمٌ وَمُعْتَمِرٌ وَخَالِدٌ الْوَاسِطِيُّ وَجَمَاعَةٌ لَمْ يَذْكُرُوا جَرِيرًا ‏.‏
जरीर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़सअम क़बीले की ओर एक सैन्यदल भेजा। (युद्ध के दौरान) उनमें से कुछ लोग बचाव के लिए सजदे में गिर पड़े, लेकिन मुसलमानों ने देर किए बिना उन्हें क़त्ल कर डाला। वर्णनकर्ता का कहना है कि इसकी सूचना नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को मिली, तो उनके लिए आधी दियत अदा करने का आदेश दिया और फ़रमायाः "मैं हर उस मुसलमान से बरी हूँ, जो काफ़िरों के बीच में रहता हो।" लोगों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, आख़िर क्यों? आपने फ़रमायाः "उन दोनों की आग एक-दूसरे को नहीं दिखनी चाहिए।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।