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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2605

नंबर 2605किताब 15, नंबर 129
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ يُونُسَ بْنِ يَزِيدَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَلَّمَا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَخْرُجُ فِي سَفَرٍ إِلاَّ يَوْمَ الْخَمِيسِ ‏.‏
Narrated Ka'b ibn Malik: It was rarely that the Messenger of Allah (ﷺ) set out on a journey on any day but on a Thursday
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (2948)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Jihad (Kitab Al-Jihad)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।