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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2443

नंबर 2443किताब 14, नंबर 131
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، قَالَ أَخْبَرَنِي نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كَانَ عَاشُورَاءُ يَوْمًا نَصُومُهُ فِي الْجَاهِلِيَّةِ فَلَمَّا نَزَلَ رَمَضَانُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ هَذَا يَوْمٌ مِنْ أَيَّامِ اللَّهِ فَمَنْ شَاءَ صَامَهُ وَمَنْ شَاءَ تَرَكَهُ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar said:'Ashurah was a day on which we used to fast in pre-Islamic days. When (fasting of) Ramadan was prescribed, the Messenger of Allah (ﷺ) said: This is one of the days of Allah ; he who wishes may fast on it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (4501) Sahih Muslim (1126)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · Fasting (Kitab Al-Siyam)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।