حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا زَائِدَةُ، عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ سَافَرْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي رَمَضَانَ فَصَامَ بَعْضُنَا وَأَفْطَرَ بَعْضُنَا فَلَمْ يَعِبِ الصَّائِمُ عَلَى الْمُفْطِرِ وَلاَ الْمُفْطِرُ عَلَى الصَّائِمِ .
Narrated Anas :We travelled along with the Prophet (ﷺ) during Ramadan. Some of us were fasting and other broke their fast. Those who fasted did not find fault with those who broke, and those who broke their fast did not find fault with those who fasted
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih Bukhari (1947) Sahih Muslim (1118)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।