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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2238

नंबर 2238किताब 13, नंबर 64
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَجُلاً، جَاءَ مُسْلِمًا عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثُمَّ جَاءَتِ امْرَأَتُهُ مُسْلِمَةً بَعْدَهُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّهَا قَدْ كَانَتْ أَسْلَمَتْ مَعِي ‏.‏ فَرَدَّهَا عَلَيْهِ ‏.‏
Narrated Abdullah ibn Abbas: A man came after embracing Islam during the time of the Messenger of Allah (ﷺ). Afterwards his wife came after embracing Islam. He said: Messenger of Allah, she embraced Islam along with me; so restore her to me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · Divorce (Kitab Al-Talaq)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।