حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ زَيْدِ بْنِ أَبِي الزَّرْقَاءِ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَاشِدٍ، عَنْ مَكْحُولٍ، نَحْوَ خَبَرِ سَهْلٍ قَالَ وَكَانَ مَكْحُولٌ يَقُولُ لَيْسَ ذَلِكَ لأَحَدٍ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم .
Makhul has also transmitted a tradition like the one narrated by Sahl (b. Sa'd al-Sa'idi). Makhul used to say:This is not lawful for anyone after the Messenger of Allah (ﷺ)
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।