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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2062

नंबर 2062किताब 12, नंबर 17
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ الْقَعْنَبِيُّ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ، عَنْ عَمْرَةَ بِنْتِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّهَا قَالَتْ كَانَ فِيمَا أَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ مِنَ الْقُرْآنِ عَشْرُ رَضَعَاتٍ يُحَرِّمْنَ ثُمَّ نُسِخْنَ بِخَمْسٍ مَعْلُومَاتٍ يُحَرِّمْنَ فَتُوُفِّيَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَهُنَّ مِمَّا يُقْرَأُ مِنَ الْقُرْآنِ ‏.‏
A’ishah said “In what was sent down in the Qu’ran ten suckling’s made marriage unlawful, but they were abrogated by five known ones and when the Prophet (ﷺ) dies, these words were among what was recited in the Qur’an.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (1452)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 12 · Marriage (Kitab Al-Nikah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।