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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2026

नंबर 2026किताब 11, नंबर 306
حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي زِيَادٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ صَفْوَانَ، قَالَ قُلْتُ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ كَيْفَ صَنَعَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حِينَ دَخَلَ الْكَعْبَةَ قَالَ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ ‏.‏
‘Abd Al Rahman bin Safwan said “I asked ‘Umar bin Al Khattab How did the Apostle of Allaah(ﷺ) do when he entered the Ka’bah? He said “He offered two rak’ahs of prayer.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।