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सुनन अबू दाऊद

नंबर 2002

नंबर 2002किताब 11, नंबर 282
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ سُلَيْمَانَ الأَحْوَلِ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ النَّاسُ يَنْصَرِفُونَ فِي كُلِّ وَجْهٍ فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ يَنْفِرَنَّ أَحَدٌ حَتَّى يَكُونَ آخِرُ عَهْدِهِ الطَّوَافَ بِالْبَيْتِ ‏"‏ ‏.‏
Narrated Ibn 'Abbas:The people used to go out (from Mecca after Hajj) by all sides. The Prophet (ﷺ) said: No one should leave (Mecca) until he performs the last circumambulation of the House (the Ka'bah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (1327)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।