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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1955

नंबर 1955किताब 11, नंबर 235
حَدَّثَنَا مُؤَمَّلٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْفَضْلِ - الْحَرَّانِيُّ - حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، حَدَّثَنَا ابْنُ جَابِرٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمُ بْنُ عَامِرٍ الْكَلاَعِيُّ، سَمِعْتُ أَبَا أُمَامَةَ، يَقُولُ سَمِعْتُ خُطْبَةَ، رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِمِنًى يَوْمَ النَّحْرِ ‏.‏
Narrated Abu Umamah:I heard the address of the Messenger of Allah (ﷺ) at Mina on the day of sacrifice
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।