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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1941

नंबर 1941किताब 11, नंबर 221
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ عُقْبَةَ، حَدَّثَنَا حَمْزَةُ الزَّيَّاتُ، عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُقَدِّمُ ضُعَفَاءَ أَهْلِهِ بِغَلَسٍ وَيَأْمُرُهُمْ يَعْنِي لاَ يَرْمُونَ الْجَمْرَةَ حَتَّى تَطْلُعَ الشَّمْسُ ‏.‏
Narrated Abdullah ibn Abbas: The Messenger of Allah (ﷺ) used to send ahead the weak members of his family in darkness (to Mina), and command them not to throw pebbles at jamrahs until the sun rose
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।