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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1930

नंबर 1930किताब 11, नंबर 210
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الأَنْبَارِيُّ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، - يَعْنِي ابْنَ يُوسُفَ - عَنْ شَرِيكٍ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَالِكٍ، قَالاَ صَلَّيْنَا مَعَ ابْنِ عُمَرَ بِالْمُزْدَلِفَةِ الْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ بِإِقَامَةٍ وَاحِدَةٍ فَذَكَرَ مَعْنَى حَدِيثِ ابْنِ كَثِيرٍ ‏.‏
Sa’id bin Jubair and ‘Abd Allah bin Malik said “We offered the sunset and the night prayers at Al Muzdalifah along with ibn ‘Umar with one iqamah.” The narrator then narrated the rest of the tradition as reported by Ibn Kathir
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Muslim (1288)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।