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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1915

नंबर 1915किताब 11, नंबर 195
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، عَنِ ابْنِ أَبِي زَائِدَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنْ رَجُلٍ، مِنْ بَنِي ضَمْرَةَ عَنْ أَبِيهِ، أَوْ عَمِّهِ قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ عَلَى الْمِنْبَرِ بِعَرَفَةَ ‏.‏
A man from banu Damrah reported on the authority of his father or his uncle “ I saw the Apostle of Allaah(ﷺ) on the pulpit in ‘Arafah.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।