حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا الأَحْوَصُ بْنُ جَوَّابٍ الضَّبِّيُّ، حَدَّثَنَا عَمَّارُ بْنُ رُزَيْقٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ الأَعْمَشِ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ مِقْسَمٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الظُّهْرَ يَوْمَ التَّرْوِيَةِ وَالْفَجْرَ يَوْمَ عَرَفَةَ بِمِنًى .
Narrated Abdullah ibn Abbas: The Messenger of Allah (ﷺ) offered the noon prayer on the 8th of Dhul-Hijjah (Yawm at-Tarwiyah) and dawn prayer on the 9th of Dhul-Hijjah (Yawm al-Arafah) in Mina
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
HasanShuaib Al Arnaut
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।