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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1871

नंबर 1871किताब 11, नंबर 151
حَدَّثَنَا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا سَلاَّمُ بْنُ مِسْكِينٍ، حَدَّثَنَا ثَابِتٌ الْبُنَانِيُّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ رَبَاحٍ الأَنْصَارِيِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم لَمَّا دَخَلَ مَكَّةَ طَافَ بِالْبَيْتِ وَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ خَلْفَ الْمَقَامِ يَعْنِي يَوْمَ الْفَتْحِ ‏.‏
Abu Hurairah said When the Prophet(ﷺ) entered Makkah he circumambulated the House(the Ka’bah) and offered two rak’ahs of prayer behind the station. That is, he did so on the day of the Conquest (of Makkah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad Sahih Sahih Muslim (1780)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।