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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1865

नंबर 1865किताब 11, नंबर 145
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ، كَانَ إِذَا قَدِمَ مَكَّةَ بَاتَ بِذِي طُوًى حَتَّى يُصْبِحَ وَيَغْتَسِلَ ثُمَّ يَدْخُلُ مَكَّةَ نَهَارًا وَيَذْكُرُ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ فَعَلَهُ ‏.‏
Nafi’ said It was Ibn ‘Umar’s habit that whenever he came to Makkah he spent the night at Dhu Tuwa in the morning he would take a bath and enter Makkah in the daytime. He used to say the Prophet (ﷺ) had done so
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।