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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1857

नंबर 1857किताब 11, नंबर 137
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ دَاوُدَ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ لَهُ ‏ "‏ إِنْ شِئْتَ فَانْسُكْ نَسِيكَةً وَإِنْ شِئْتَ فَصُمْ ثَلاَثَةَ أَيَّامٍ وَإِنْ شِئْتَ فَأَطْعِمْ ثَلاَثَةَ آصُعٍ مِنْ تَمْرٍ لِسِتَّةِ مَسَاكِينَ ‏"‏ ‏.‏
Ka’ab bin ‘Ujrah said that the Apostle of Allaah(ﷺ) said to him, If you like sacrifice an animal or if you like fast three days or if you like give three sa’s of dates to six poor people
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।