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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1850

नंबर 1850किताब 11, नंबर 130
حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ، مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ قَيْسٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّهُ قَالَ يَا زَيْدُ بْنَ أَرْقَمَ هَلْ عَلِمْتَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أُهْدِيَ إِلَيْهِ عُضْوُ صَيْدٍ فَلَمْ يَقْبَلْهُ وَقَالَ ‏ "‏ إِنَّا حُرُمٌ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ نَعَمْ ‏.‏
Ibn ‘Abbas said Zaid bin ‘Arqam do you know that the limb of a game was presented to the Apostle of Allaah(ﷺ) but he did not accept it. He said “We are wearing ihram”. He replied, Yes
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।