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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1820

नंबर 1820किताब 11, नंबर 100
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ أَبِي بِشْرٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ يَعْلَى بْنِ أُمَيَّةَ، وَهُشَيْمٌ، عَنِ الْحَجَّاجِ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ يَعْلَى، عَنْ أَبِيهِ، بِهَذِهِ الْقِصَّةِ قَالَ فِيهِ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اخْلَعْ جُبَّتَكَ ‏"‏ ‏.‏ فَخَلَعَهَا مِنْ رَأْسِهِ وَسَاقَ الْحَدِيثَ ‏.‏
This tradition has also been narrated by Ya’la bin Umayyah through a different chain of narrators. This version adds The Prophet (ﷺ) said to him “Take off your tunic”. He then took it off from his head. The narrator then narrated the rest of the tradition
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • MunkarAl-Albani
  • MunkarMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।