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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1773

नंबर 1773किताब 11, नंबर 53
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الظُّهْرَ بِالْمَدِينَةِ أَرْبَعًا وَصَلَّى الْعَصْرَ بِذِي الْحُلَيْفَةِ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ بَاتَ بِذِي الْحُلَيْفَةِ حَتَّى أَصْبَحَ فَلَمَّا رَكِبَ رَاحِلَتَهُ وَاسْتَوَتْ بِهِ أَهَلَّ ‏.‏
Anas said :Messenger of Allah (SWAS) prayed four rak’ahs at Madinah and prayed two rak’ahs of afternoon prayer at Dhu-al Hulaifah. He then passed the night at Dhu-al Hulaifah till the morning came. When he rode on his mount and it stood up on its back, he raised his voice in talbiyah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih Bukhari (1546) Sahih Muslim (690)Zubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।