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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1764

नंबर 1764किताब 11, नंबर 44
حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، وَيَعْلَى، ابْنَا عُبَيْدٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَاقَ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ عَلِيٍّ، - رضى الله عنه - قَالَ لَمَّا نَحَرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بُدْنَهُ فَنَحَرَ ثَلاَثِينَ بِيَدِهِ وَأَمَرَنِي فَنَحَرْتُ سَائِرَهَا ‏.‏
Narrated Ali ibn AbuTalib: When the Messenger of Allah (ﷺ) sacrificed the camels, he sacrificed thirty of them with his own hand, and then commanded me (to sacrifice them), so I sacrificed the rest of them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • MunkarAl-Albani
  • MunkarMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।