حَدَّثَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، وَيَعْلَى، ابْنَا عُبَيْدٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَاقَ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ عَلِيٍّ، - رضى الله عنه - قَالَ لَمَّا نَحَرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بُدْنَهُ فَنَحَرَ ثَلاَثِينَ بِيَدِهِ وَأَمَرَنِي فَنَحَرْتُ سَائِرَهَا .
Narrated Ali ibn AbuTalib: When the Messenger of Allah (ﷺ) sacrificed the camels, he sacrificed thirty of them with his own hand, and then commanded me (to sacrifice them), so I sacrificed the rest of them
स्रोत में दर्ज दर्जे
MunkarAl-Albani
MunkarMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।