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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1754

नंबर 1754किताब 11, नंबर 34
حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى بْنُ حَمَّادٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنِ الْمِسْوَرِ بْنِ مَخْرَمَةَ، وَمَرْوَانَ، أَنَّهُمَا قَالاَ خَرَجَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَامَ الْحُدَيْبِيَةِ فَلَمَّا كَانَ بِذِي الْحُلَيْفَةِ قَلَّدَ الْهَدْىَ وَأَشْعَرَهُ وَأَحْرَمَ ‏.‏
Al-Miswar bin Makhramah and al-Marwan said the Messenger of Allah (SWAS) proceeded in the year of al-Hudaibiyyah (to Makkah). When he reached Dhu al-Hulaifah, he tied (garlanded) something in the neck of the sacrificial camel (which He took along with him), and made incision in its hump and put on Ihram
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।